मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित चिरहुला नाथ मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ भक्तों की आस्था, लोक-मान्यताएँ तथा सांस्कृतिक आयोजनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम इस मंदिर का इतिहास, मान्यताएँ, स्थापत्य, प्रमुख त्योहार-दिन, दर्शन-पूजा की जानकारी, पहुँच-मार्ग, आसपास के पर्यटन स्थल, तथा वहाँ जाकर क्या अनुभव मिलेगा . यह लेख उन पाठकों के लिए लिखा गया है जो धार्मिक यात्रा, धरोहरों में रुचि रखते हैं और विशेष रूप से “चिरहुला नाथ मंदिर रीवा” के बारे में जानना चाहते हैं। 

chirahula mandir REWA


जगह का परिचय 

 चिरहुला नाथ मंदिर रीवा शहर के पूर्व दिशा-भाग में चिरहुला (या चिराहुला) नामक स्थान पर स्थित है।  यह मंदिर प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ आस्था की एक अनोखी धारणा पाई जाती है: कि यह मंदिर “भगवान की अदालत” जैसा स्थान है जहाँ भक्त अपनी अर्जी लगाते हैं और न्याय की उम्मीद करते हैं।  मंदिर का नाम “चिरहुला नाथ” इसलिए पड़ा क्योंकि इसे चिरौल दास बाबा ने स्थापित किया था — कहा जाता है कि इन्होंने बजरंगबली की स्थापना की थी। मंदिर के ठीक पास एक तालाब भी है, जिसे मंदिर के परिसर का हिस्सा माना गया है — इससे आसपास का वातावरण शांत-स्वभावी हो जाता है। 

इतिहास एवं स्थापत्य 

स्थापत्य चिरहुला नाथ मंदिर की आर्किटेक्चर में क्लासिक भारतीय मंदिर शैली के तत्व दिखाई देते हैं — गर्भगृह, मूर्ति-मंच, मंडप आदि संरचनात्मक पौराणिक मंदिरों की तरह हैं। खास बात यह है कि मंदिर के समीप द्वादश ज्योतिर्लिंगों का एक छोटा मंदिर परिसर भी है, जहाँ शिव-लिंगों की श्रृंखला दर्शनीय है। 
मंदिर के प्रांगण में बड़े पेड़, तालाब तथा खुला स्थान है, जहाँ सुबह-शाम भक्त विश्राम कर सकते हैं। 

 इतिहास 

 माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 500 वर्ष पूर्व स्थापित हुआ था।  चिरौल दास बाबा द्वारा बजरंगबली की स्थापना की गई और तभी से यह मंदिर आस्था का केंद्र बन गया। ( इतिहास में रीवा रियासत के शासनकाल में इस मंदिर का विकास हुआ और स्थानीय लोगों द्वारा इसे “सिद्धपीठ” का दर्जा भी मिला है। 

  धार्मिक एवं लोक-मान्यताएँ 

 चिरहुला मंदिर की सबसे प्रसिद्ध मान्यता है कि यहाँ भगवान बजरंगबली (हनुमानजी) न्याय करते हैं — यानी भक्त अपनी शिकायतें, अर्जी, मनोकामनाएं लेकर आते हैं और उन्हें “न्याय” की आशा होती है। “चिरहुला मंदिर को हनुमानजी की अदालत कहा जाता है.  यहाँ आने वाले हर एक श्रद्धालु की पीड़ा दूर हो जाती है।”  भक्त मानते हैं कि मंगलवार व शनिवार इस मंदिर में विशेष महत्व रखते हैं: इन दिनों विशेष पूजा-आराधना, कथा-पाठ, भंडारा आदि आयोजित होते हैं और भक्तों की भीड़ अधिक रहती है।  मंदिर में यदि किसी की मनोकामना पूर्ण हो जाती है, तो वह वहाँ सुन्दरकाण्ड-पाठ या भंडारे का आयोजन करता है।

 पूजा-अर्चना, दर्शन एवं विशेष आयोजन  

  
 मंदिर में मुख्य  बजरंगबली की प्रतिमा है। भक्त मंदिर में आते हैं, चढावा चढ़ाते हैं, आरती-भजन करते हैं तथा विशेष अवसर पर कथा-पाठ सुनते हैं। दर्शन के लिए मंगलवार व शनिवार को विशेष रूप से भक्त बड़ी संख्या में आते हैं। 

 भंडारा

 कथा-पाठ एवं अनुष्ठान मंदिर परिसर में भंडारा (भोजन वितरण) और कथा-संपन्न कार्यक्रम अक्सर आयोजित होते हैं।  कथा वाचक द्वारा रामचरितमानस, भागवत आदि सुनाए जाते हैं। एक उदाहरण के रूप में, मध दिन बड़े आयोजन में कलश यात्रा निकाली गई — जहाँ चिरहुला मंदिर से लेकर लक्ष्मणबाग तक रामदरबार की प्रतिमूर्ति एवं भजन-कीर्तन हुआ।

 विशेष आयोजन

 मंदिर परिसर में दीपोत्सव के आयोजन भी सुने गए हैं — जैसे पर्व-उत्सवों, गौरव दिवस आदि के अवसर पर हजारों दीप जलाए जाते हैं।

 आस्था एवं सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव 

 चिरहुला नाथ मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल न होकर एक सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्र भी है। गाँवों व शहरों से आए श्रद्धालु यहाँ एक साथ मिलते हैं। भंडारा, कथा-पाठ, पूजा-विभाजन आदि समाज-समागम का रूप लेते हैं। मंदिर को न्यायालय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है — यह सामाजिक-मानसिक पक्ष को भी सम्मान देता है जहाँ लोगों को अपनी मनोकामनाओं, शिकायतों के लिए “दैवी न्याय” की आशा होती है। मंदिर परिसर में निर्माण-संवर्द्धन का काम भी जारी है — जैसे कि सेफ-भोजन प्लेस (safe bhog place) की व्यवस्था।

पहुँच एवं  यात्रा सूचना

 स्थानीय पहुँच रीवा शहर से चिरहुला नाथ मंदिर आसान पहुँच पर है। चिरहुला कोलोनी के पास स्थित है। 

 यात्रा-समय एवं सुझाव 

 मंदिर दर्शन के लिए सुबह जल्दी जाना लाभदायक है — विशेषकर मंगलवार या शनिवार को भीड़ अधिक होती है। अगर संभव हो, तो इन दिनों से बच कर अन्य समय में भी जाना जा सकता है। मंदिर परिसर में खुला स्थान, तालाब एवं वृक्ष-प्रांगण है — इसलिए आरामदायक जूते पहनना उचित रहेगा।

 आसपास के पर्यटन स्थल 

 यदि आप चिरहुला मंदिर यात्रा कर रहे हैं, तो रीवा के अन्य आकर्षण भी देख सकते हैं, जैसे लक्ष्मणबाग, रामसागर, रीवा रियासत का पुराना इतिहास आदि।

 क्या देखें-क्या अनुभव करें

  •  मंदिर के बाहर स्थित तालाब के किनारे शाम-साँझ बैठना एक शांत अनुभव है। 
  •  मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन सुनना, अप्रत्याशित रूप से आध्यात्मिक अनुभव दे सकता है। 
  • मंगलवार या शनिवार में दर्शन-एव एवं पूजन-पूजा कर आस्था का अनुभव गहरा मिलता है।
  •  भक्तों के कथा-पाठ एवं भंडारे देखना सामाजिक-समाज का हिस्से बनना है। 
  • मंदिर परिसर में आसपास के वृक्ष, खुले हिस्से आपको आराम तथा मनःशांति देंगे। 

 सुझाव एवं सावधानियाँ 

  •  भीड़ के समय (विशेषकर मंगलवार/शनिवार) सावधानी से चलें। 
  •  मंदिर परिसर में कपड़े, बालू आदि स्वच्छ रखें — धार्मिक स्थान का सम्मान करें। 
  •  भोजन या भंडारे में स्वच्छता पर ध्यान दें — हाल ही में मंदिर में सेफ-भोजन व्यवस्था की घोषणा हुई है। 
  •  फोटोग्राफी-से पहले मंदिर प्रशासन से अनुमति लें। 
  •  उत्सव-दिनों में पार्किंग की दिक्कत हो सकती है — समय से पहले निकलें। 

 निष्कर्ष

 चिरहुला नाथ मंदिर, रीवा, आस्था, परंपरा और सामाजिक जुड़ाव का एक समृद्ध स्थल है। लोगों की मनोकामनाएँ, श्रद्धा-भक्ति, कथा-पाठ, पूजा-अर्चना — सब यहाँ समाहित हैं। जब आप इस मंदिर की यात्रा करेंगे, तो सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत सामाजिक-संस्कृति का अनुभव करेंगे। यदि आप मध्य प्रदेश के धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन की योजना बना रहे हैं — तो इस मंदिर को अपने यात्रा सूची में अवश्य शामिल करें। यहाँ का वातावरण, आस्था-भावना और स्थल-परिवेश, सब आपका दिल छू लेंगे।