भैरव नाथ मंदिर गुढ़ मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध और पौराणिक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर Bhairav Nath Temple Gurh Rewa के नाम से देशभर में जाना जाता है। भैरव बाबा को भगवान शिव का रौद्र रूप माना गया है और यह मंदिर उनकी अनंत शक्ति, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। स्थानीय लोग इसे भैरव बाबा मंदिर गुढ़ रीवा के नाम से पूजते हैं।
यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण भी विशेष स्थान रखता है। यहाँ हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन और आशीर्वाद के लिए आते हैं। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे भैरव नाथ मंदिर गुढ़ का इतिहास, इसकी विशेषताएँ, लोककथाएँ, पूजा-विधि, और यात्रा से जुड़ी पूरी जानकारी।
भैरव नाथ मंदिर गुढ़ का इतिहास
भैरव नाथ मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना बताया जाता है। यह स्थान गुढ़(Gurh) कस्बे में स्थित है जो रीवा जिले से लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर है। मान्यता है कि यह मंदिर लगभग 1000 साल पुराना है और यहाँ की भैरव प्रतिमा मध्यकालीन काल की है। कई पुरातात्विक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंदिर 10वीं या 11वीं शताब्दी के काल का हो सकता है।
पुरानी लोककथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने ब्रह्मा के अहंकार को नष्ट करने के लिए भैरव रूप धारण किया, तो उसी रूप की पूजा के लिए इस मंदिर की स्थापना की गई थी। स्थानीय ग्रंथों में उल्लेख है कि यहाँ का भैरव रूप अत्यंत शक्तिशाली और उग्र है, परंतु भक्तों के प्रति दयालु और करुणामय भी है।
इस मंदिर को मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है और भैरव नाथ मंदिर रीवा की पहचान अब पूरे देश में फैल चुकी है।
मंदिर की वास्तुकला और विशेषताएँ
Bhairav Nath Temple Gurh Rewa की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थित विशाल भैरव प्रतिमा है। यह प्रतिमा लगभग 28 फीट लंबी और 12 फीट चौड़ी बताई जाती है। प्रतिमा लाल बलुआ पत्थर से बनी है और यह लेटी हुई मुद्रा में स्थित है, जो इसे भारत की अनोखी प्रतिमाओं में से एक बनाती है।
प्रतिमा के चार हाथ हैं – एक में त्रिशूल, दूसरे में रुद्राक्ष माला, तीसरे में सांप और चौथे में कलश है। प्रतिमा के चेहरे पर शांत और तेजस्वी भाव हैं। ऐसा कहा जाता है कि प्रतिमा के चारों ओर एक अदृश्य ऊर्जा का क्षेत्र है, जो भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
मंदिर के परिसर में एक प्राचीन तालाब भी है, जिसे भैरव कुंड कहा जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कुंड का जल पवित्र है और इसमें स्नान करने से नकारात्मक शक्तियाँ नष्ट होती हैं।
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व
भैरव बाबा को तंत्र साधना, सुरक्षा और न्याय के देवता के रूप में जाना जाता है। भैरव नाथ मंदिर गुढ़ रीवा में पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से भय, नकारात्मकता और बाधाएँ दूर होती हैं। भक्त मानते हैं कि भैरव बाबा मंदिर रीवा में की गई साधना तुरंत फल देती है।
यहाँ हर मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा होती है। भैरव बाबा को मदिरा, नींबू, नारियल और सरसों के तेल का दीप चढ़ाने की परंपरा है। स्थानीय लोग कहते हैं कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहाँ कभी व्यर्थ नहीं जाती।
यह स्थान रीवा का एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल (Rewa tourist place) है और देशभर से लोग यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
भैरव बाबा से जुड़ी लोककथाएँ
भैरव नाथ मंदिर गुरह से कई रोचक लोककथाएँ जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि एक बार गाँव में महामारी फैल गई थी। तब एक वृद्ध साधु ने कहा कि इस भूमि के नीचे भैरव नाथ की मूर्ति विराजमान है। जब गाँव वालों ने खुदाई की, तो उन्हें लाल पत्थर की यह विशाल मूर्ति मिली। उस दिन से यहाँ पूजा आरंभ हुई और महामारी समाप्त हो गई।
एक अन्य कथा के अनुसार, भैरव बाबा रात में मंदिर परिसर में स्वयं गश्त लगाते हैं। कई भक्तों ने यह अनुभव किया है कि देर रात मंदिर के पास से गुजरने पर उन्हें घंटियों की ध्वनि और धूप की सुगंध महसूस होती है।
मंदिर परिसर का प्राकृतिक सौंदर्य
भैरव नाथ मंदिर एक शांत और हरियाली से घिरे क्षेत्र में स्थित है। मंदिर के आसपास घने पेड़, झीलें और प्राकृतिक सौंदर्य वातावरण को अत्यंत पवित्र बनाते हैं। मंदिर के सामने फैला भैरव कुंड वातावरण में शांति और आध्यात्मिकता का अनुभव कराता है।
सुबह और शाम के समय यहाँ सूर्य की किरणें प्रतिमा पर पड़ती हैं, जिससे दिव्य आभा उत्पन्न होती है। यह दृश्य अत्यंत मनमोहक और आत्मिक शांति देने वाला होता है।
पूजा-विधि और प्रमुख पर्व
Bhairav Nath Temple Gurh Rewa में पूजा के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं है, लेकिन अधिकतर लोग सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे और शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन करते हैं।
मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ होती है। इस दिन भक्त भैरव बाबा को तेल, फूल, नींबू, नारियल और अगरबत्ती अर्पित करते हैं।
प्रत्येक वर्ष सावन के महीने में हर मंगलवार पर यहाँ विशाल मेला लगता है। उस समय पूरा गुढ़ नगर भक्ति में डूब जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु इस मेले में भाग लेने आते हैं।
मंदिर तक पहुँचने का मार्ग
भैरव नाथ मंदिर गुढ़ रीवा तक पहुँचना बहुत आसान है। यह रीवा शहर से लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
- रीवा से गुढ़ तक नियमित बस और टैक्सी सेवाएँ उपलब्ध हैं।
- रीवा रेलवे स्टेशन निकटतम स्टेशन है, जहाँ से मंदिर तक 40 मिनट में पहुँचा जा सकता है।
- यदि आप निजी वाहन से जा रहे हैं, तो रीवा से sidhi रोड होते हुए गुढ़ पहुँचना सबसे सुविधाजनक है।
मंदिर के पास पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध है। आसपास छोटे चाय-नाश्ते के स्टॉल और पूजा सामग्री की दुकाने भी हैं।
आसपास के दर्शनीय स्थल
गुढ़ और रीवा क्षेत्र में कई अन्य पर्यटन स्थल भी हैं जिन्हें आप भैरव नाथ मंदिर गुरह के दर्शन के साथ देख सकते हैं:
- केओटी जलप्रपात (Keoti Waterfall) – यह रीवा का सबसे प्रसिद्ध जलप्रपात है जो लगभग 25 किमी दूर है।
- गोविंदगढ़ किला – ऐतिहासिक महत्व वाला किला जहाँ की झील अत्यंत सुंदर है।
- रेवा फोर्ट – बघेल राजा का यह महल इतिहास और शिल्पकला का प्रतीक है।
- चिरहुला मंदिर – भैरव बाबा की तरह यह भी रीवा का प्रसिद्ध शिव मंदिर है।
यात्रियों के लिए सुझाव
यदि आप भैरव नाथ मंदिर गुढ़ रीवा की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
- गर्मियों के मौसम (मई-जून) में तापमान अधिक होता है, इसलिए सुबह या शाम का समय चुनें।
- आरामदायक जूते पहनें क्योंकि मंदिर के आसपास थोड़ी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है।
- मंदिर में शांति बनाए रखें और मोबाइल फोन का उपयोग सीमित करें।
- भैरव बाबा के दर्शन के बाद भैरव कुंड के पास ध्यान या प्रार्थना करने का विशेष अनुभव लें।
- रीवा शहर में ठहरने के लिए कई होटल और धर्मशालाएँ उपलब्ध हैं।
भैरव नाथ मंदिर गुढ़ रीवा का सांस्कृतिक प्रभाव
भैरव नाथ मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं बल्कि रीवा क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। हर त्योहार, विवाह या शुभ कार्य से पहले लोग भैरव बाबा का आशीर्वाद लेने आते हैं। यह मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था और जीवन का केंद्र है।
भैरव बाबा के गीत, भजन और कीर्तन यहाँ के लोकसंगीत का हिस्सा बन चुके हैं। मंदिर परिसर में हर अमावस्या और पूर्णिमा को विशेष भजन संध्या आयोजित की जाती है, जिसमें दूर-दूर से लोग भाग लेते हैं।
निष्कर्ष
भैरव नाथ मंदिर गुढ़ रीवा (Bhairav Nath Temple Gurh Rewa) मध्य प्रदेश का एक ऐसा दिव्य स्थल है जहाँ श्रद्धा, शक्ति और शांति का अद्भुत संगम है। यहाँ की विशाल भैरव प्रतिमा, पवित्र कुंड और प्राकृतिक वातावरण भक्तों को आत्मिक शांति प्रदान करता है।
यदि आप रीवा या उसके आसपास घूमने की योजना बना रहे हैं, तो भैरव बाबा मंदिर रीवा को अपनी यात्रा सूची में अवश्य शामिल करें। यह स्थान न केवल आपकी आध्यात्मिक यात्रा को पूर्ण करेगा बल्कि आपको भारतीय संस्कृति, इतिहास और भक्ति की गहराई से जोड़ देगा।
भैरव बाबा का आशीर्वाद सभी पर बना रहे – जय भैरव नाथ!

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